*एस्कॉर्ट ना मिलने पर छलका हरदा का दर्द*
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कहा- SSP अपने को खांटी का भाजपाई तो छोड़िए, BJP के वैचारिक बाप सिद्ध करने में तुले हुए हैंl
पूर्व सीएम हरीश रावत ने एस्कॉर्ट ना मिलने पर नाराजगी जाहिर की और नैनीताल एसएसपी पर गंभीर सवाल खड़े किए।
हरीश रावत ने लिखा कि मेरा सरकार से झगड़ा यह नहीं है कि मुझे एस्कॉर्ट क्यों नहीं दी जा रही है। मगर जब कभी मैं जाम में फंसता हूँ, तो उस समय मुझे एस्कॉर्ट न होने की कमी खलती है। यह तथ्य सबको विदित था कि हमारी धन्यवाद यात्रा के दौरान सह-यात्रियों की गाड़ियाँ सुरक्षित निकल जाएँ और सड़कों पर जाम भी न लगे, इस हेतु मैंने पुलिस एस्कॉर्ट की अपेक्षा की थी।
#अफजलगढ़ जैसे कंजस्टेड (भीड़भाड़ वाले) एरिया में भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने हमारी सैकड़ों गाड़ियों को बिना यातायात विलंबित किए आगे बढ़ा दिया। जसपुर में यह व्यवस्था चरमराती हुई नजर आई, जो काशीपुर पहुंचकर पूरी तरीके से ध्वस्त हो गई। मैंने पुलिस से अपेक्षित सहयोग मांगा, लेकिन सहयोग के बजाय हमारी गाड़ियाँ अलग-अलग रूट्स में डाल दी गईं और उस यात्रा को समेटने में हमें पुनः 1 से सवा घंटा लग गया। काशीपुर पुलिस ने हमको मुख्य मार्ग से भी नहीं जाने दिया। मगर शिकायत करें तो किससे करें? रामनगर आकर तो मुंह का स्वाद और कड़वा हो गया, जो हल्द्वानी तक बना रहा।
राज्य में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसदगणों को पुलिस एस्कॉर्ट व अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। मैं विपक्ष का एकमात्र पूर्व मुख्यमंत्री हूँ जो सत्ता की इस कृपा से वंचित हूँ। यूं तो राज्य में 13 मंत्री या मंत्री के समकक्ष (जिन्हें एस्कॉर्ट भी सम्मिलित है) इसके हकदार हैं। बाकी विधायकों को यह सुविधा नहीं दी जा रही है। मगर एक चहेते विधायक को—जिसमें भाजपा भविष्य का सुपारी किलर देखती है—उसे पुलिस सहित कई तरीके की सुविधाएं प्राप्त हैं और ऐसा नहीं है कि पुलिस का रवैया हमारी प्रत्येक यात्रा में इसी तरीके का रहा हो। जब मैं नारसन से घर तक आया, तो उस दौरान हमें परफेक्ट एस्कॉर्ट और पुलिस मदद दी गई। सैकड़ों गाड़ियों का काफिला मिनटों में आगे बढ़ गया। मगर नैनीताल के SSP अपने को खांटी का भाजपाई तो छोड़िए, भाजपा के वैचारिक बाप सिद्ध करने में तुले हुए हैं और इसलिए उन्होंने मेरे अनुरोध को दरकिनार कर कोई सुविधा देने के बजाय रामनगर में भी यात्रा को विलंबित किया। इसके परिणामस्वरूप हम साढ़े तीन घंटे विलंब से कालाढूंगी और हल्द्वानी पहुंचे।
#Thankyou उत्तराखंड पुलिस!
जनता सब देख रही है और जनता सब कुछ जानती है।
