*‘उत्तराखंड विकास कॉन्क्लेव–संकल्प, विकसित उत्तराखंड@2047’*

0
img_1790146266896

देहरादून में ‘उत्तराखंड विकास कॉन्क्लेव–संकल्प, विकसित उत्तराखंड@2047’ का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाने की दीर्घकालिक रणनीति को लेकर व्यापक मंथन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विकास की दिशा, नीतिगत चुनौतियों, नवाचार, निवेश, बुनियादी ढांचे, विकास की नई संभावनाओं और हिमालयी क्षेत्रों की जरूरतों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। कॉन्क्लेव में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत, विकास भागीदारों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।

देहरादून के होटल रामाडा में आयोजित ‘उत्तराखंड विकास कॉन्क्लेव–संकल्प, विकसित उत्तराखंड@2047’ का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के विकास को लेकर दीर्घकालिक विजन तैयार करना और वर्ष 2047 तक विकसित उत्तराखंड के संकल्प को साकार करने की दिशा में ठोस रणनीति पर विचार-विमर्श करना रहा।

कॉन्क्लेव में प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों और अधिकारियों ने अपने विचार रखे। बदलती परिस्थितियों और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य के विकास की रणनीति, नीतिगत सुधार, नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में हिमालयी राज्य के रूप में उत्तराखंड की विशिष्ट परिस्थितियों और चुनौतियों को भी प्रमुखता से रखा गया। हिमालयी क्षेत्रों में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन, स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का निर्माण तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की सुविधाएं पहुंचाने को लेकर भी विचार साझा किए गए।

अपर सचिव मुख्यमंत्री बंसीधर तिवारी ने बताया कि उत्तराखंड विकास कॉन्क्लेव का उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित उत्तराखंड के विजन को लेकर व्यापक विचार-विमर्श करना है। उन्होंने कहा कि इस मंथन में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, उद्योग जगत और विकास से जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाया गया है, ताकि प्रदेश के विकास के लिए प्रभावी और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जा सके।

कॉन्क्लेव में नियोजन विभाग के साथ-साथ आवास, लोक निर्माण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और सूचना विभाग से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। विभिन्न विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर जानकारी और सुझाव साझा किए।

कॉन्क्लेव के दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि उत्तराखंड के विकास की रणनीति राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाए। निवेश के नए अवसर पैदा करने, नवाचार को प्रोत्साहित करने, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम में यह मंथन किया गया कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को किस तरह आर्थिक रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से सक्षम और आधारभूत सुविधाओं से बेहतर राज्य बनाया जा सकता है। साथ ही, हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विकास की योजनाओं को टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप बनाने की जरूरत पर भी विचार रखा गया।

कुल मिलाकर, ‘उत्तराखंड विकास कॉन्क्लेव–संकल्प, विकसित उत्तराखंड@2047’ प्रदेश के दीर्घकालिक विकास के लिए विचारों, अनुभवों और विशेषज्ञ सुझावों को एक मंच पर लाने की दिशा में आयोजित महत्वपूर्ण मंथन कार्यक्रम रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *