*बिना मान्यता संचालित मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई शुरू*
उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों के खिलाफ सरकार ने अब कार्रवाई तेज कर दी है। मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, समाज कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम ऐसे संस्थानों की जांच कर रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि निर्धारित मानकों और जरूरी मान्यता के बिना किसी भी शिक्षण संस्थान को संचालित नहीं होने दिया जाएगा।
प्रदेश में अब तक 452 मदरसों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से नियमों के अनुरूप संचालन नहीं पाए जाने पर 17 मदरसों को सील किया गया है। इनमें ऊधमसिंह नगर के 8, हरिद्वार के 4, नैनीताल के 4 और देहरादून का एक मदरसा शामिल है। वहीं, तीन मदरसा संचालकों ने खुद ही संस्थान बंद करने की लिखित सूचना प्रशासन को दी है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि मदरसा बंद होने की स्थिति में प्रबंधन की जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। वहां पढ़ रहे बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित प्रबंधन को समीप के अल्पसंख्यक विद्यालय में बच्चों के दाखिले से जुड़ा पत्र उपलब्ध कराना होगा। वहीं, मान्यता हासिल करने के इच्छुक मदरसा संचालकों को 30 सितंबर 2026 तक आवेदन करने का मौका दिया गया है। अब तक 200 मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जबकि इनमें से 35 मदरसों को सरकार की ओर से मान्यता दी जा चुकी है। समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजानदास ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश में कोई भी शिक्षण संस्थान बिना निर्धारित नियमों और मान्यता के संचालित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की नई व्यवस्था का मकसद किसी संस्था या समुदाय को परेशान करना नहीं, बल्कि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित शिक्षा सुनिश्चित करना है।
