*पद बड़ा हो सकता है,लेकिन संस्कार उससे भी बड़े होते हैं*

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देखिए यह वीडियो, जब भाजपा कार्यालय के गेट पर भाजपा कि सह प्रभारी बांसुरी स्वराज का सम्मान करते हुए तिलक लगाया गया, तो उन्होंने तिलक कर रही भाजपा महिला कार्यकर्ता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह छोटा-सा पल सम्मान, विनम्रता और संस्कारों की खूबसूरत झलक पेश करता है।


राजनीति में पद और प्रतिष्ठा अपनी जगह हैं, लेकिन संस्कारों की असली पहचान व्यवहार में नजर आती है। देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में नवनियुक्त सह-प्रभारी बांसुरी स्वराज का कुछ ऐसा ही अंदाज देखने को मिला, जिसने स्वागत के इस पल को खास बना दिया।

उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने तिलक लगाकर और फूल बरसाकर बांसुरी स्वराज का स्वागत किया। इस आत्मीय सम्मान के जवाब में बांसुरी स्वराज ने भी महिलाओं पर फूल बरसाए, उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और उत्तराखंड की संस्कृति व परंपरा के प्रति सम्मान प्रकट किया। लेकिन इस दौरान एक और खूबसूरत दृश्य देखने को मिला। जब एक महिला उनके पैर छूने के लिए आगे बढ़ीं, तो बांसुरी स्वराज ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। यह छोटा-सा पल आपसी सम्मान, सहजता और संस्कारों की खूबसूरत तस्वीर बन गया।

भारतीय संस्कृति में बड़ों का आशीर्वाद लेना और हर व्यक्ति को सम्मान देना, दोनों ही संस्कारों का अहम हिस्सा हैं। देहरादून में स्वागत का यह दृश्य इसी परंपरा की झलक दिखाता नजर आया, जहां राजनीति की औपचारिकता के बीच संस्कृति, सभ्यता और आत्मीयता का रंग भी दिखाई दिया।

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